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Monkeypox vs Chickenpox: à¤à¤• जैसे दिखने वाले मंकीपॉकà¥à¤¸ और चिकनपॉकà¥à¤¸ में कà¥à¤¯à¤¾ है अंतर, à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿ से समà¤à¤¿à¤
Monkeypox vs Chickenpox: मंकीपॉकà¥à¤¸ और चिकनपॉकà¥à¤¸ के लकà¥à¤·à¤£ काफी हदतक à¤à¤• जैसे ही होते हैं। तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर चकतà¥à¤¤à¥‡ और बà¥à¤–ार। इसके बाद à¤à¥€ ये दोनों बीमारियां à¤à¤• दूसरे से काफी अलग है। डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥à¤¸ ने इन दोनों के बीच का अंतर समà¤à¤¾à¤¯à¤¾ है।
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तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर चकतà¥à¤¤à¥‡ और बà¥à¤–ार, मंकीपॉकà¥à¤¸ (Monkeypox) और चिकनपॉकà¥à¤¸ (Chickenpox) दोनों के सामानà¥à¤¯ लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ ने लोगों में à¤à¥à¤°à¤® पैदा किया है । हालांकि डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤‚ का कहना है कि मरीजों में दोनों वायरल रोगों के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के पà¥à¤°à¤•ट होने के तरीके में अंतर है। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने किसी à¤à¥€ तरह के संदेह के निवारण के लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤‚ से परामरà¥à¤¶ लेने की सलाह दी है। मंकीपॉकà¥à¤¸ à¤à¤• वायरल ज़ूनोसिस (जानवरों से इंसान में फैलने वाली बीमारी) है, जिसमें चेचक के रोगियों में अतीत में देखे गठलकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के समान लकà¥à¤·à¤£ होते हैं, हालांकि यह चिकितà¥à¤¸à¤•ीय रूप से कम गंà¤à¥€à¤° है।
बरसात के मौसम में, लोगों में वायरल संकà¥à¤°à¤®à¤£ का खतरा अधिक होता है और इस दौरान चिकनपॉकà¥à¤¸ के मामले बड़े पैमाने पर अनà¥à¤¯ संकà¥à¤°à¤®à¤£à¥‹à¤‚ के साथ देखे जाते हैं जिनमें चकतà¥à¤¤à¥‡ और मतली जैसे लकà¥à¤·à¤£ à¤à¥€ दिखाई देते हैं। सिंह ने कहा, ‘इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ के कारण, कà¥à¤› रोगी à¤à¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ हो रहे हैं और चिकनपॉकà¥à¤¸ को मंकीपॉकà¥à¤¸ समà¤à¤¨à¥‡ की गलती कर रहे हैं। रोगी इसके कà¥à¤°à¤® और लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ को समà¤à¤•र यह निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ कर सकता है कि उसे मंकीपॉकà¥à¤¸ है या नहीं।’
उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि मंकीपॉकà¥à¤¸ आमतौर पर बà¥à¤–ार, असà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¤à¤¾, सिरदरà¥à¤¦, कà¤à¥€-कà¤à¥€ गले में खराश और खांसी, और लिमà¥à¤«à¥ˆà¤¡à¥‡à¤¨à¥‹à¤ªà¥ˆà¤¥ (लिमà¥à¤« नोडà¥à¤¸ में सूजन) से शà¥à¤°à¥‚ होता है और ये सà¤à¥€ लकà¥à¤·à¤£ तà¥à¤µà¤šà¤¾ के घावों, चकतà¥à¤¤à¥‡ और अनà¥à¤¯ समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं से चार दिन पहले दिखाई देते हैं, जो मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से हाथ और आंखों से शà¥à¤°à¥‚ होते हैं और पूरे शरीर में फैलते हैं। अनà¥à¤¯ विशेषजà¥à¤ž à¤à¥€ इससे सहमत हैं और उनका कहना है कि तà¥à¤µà¤šà¤¾ के अलावा, मंकीपॉकà¥à¤¸ के मामले में अनà¥à¤¯ लकà¥à¤·à¤£ à¤à¥€ हैं, लेकिन किसी à¤à¥€ संदेह को दूर करने के लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° से परामरà¥à¤¶ करना हमेशा बेहतर होता है। हाल में कà¥à¤› मामलों में मंकीपॉकà¥à¤¸ के दो संदिगà¥à¤§ मामले चिकनपॉकà¥à¤¸ के निकले।
पिछले हफà¥à¤¤à¥‡ दिलà¥à¤²à¥€ के लोक नायक जयपà¥à¤°à¤•ाश (à¤à¤²à¤à¤¨à¤œà¥‡à¤ªà¥€) असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में बà¥à¤–ार और घावों की समसà¥à¤¯à¤¾ के साथ à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ किठगठमंकीपॉकà¥à¤¸ के à¤à¤• संदिगà¥à¤§ मरीज में इस संकà¥à¤°à¤®à¤£ की पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ नहीं हà¥à¤ˆ, बलà¥à¤•ि चिकनपॉकà¥à¤¸ होने का पता चला। इसी तरह, बेंगलà¥à¤°à¥ गठइथियोपिया के à¤à¤• नागरिक में कà¥à¤› लकà¥à¤·à¤£ दिखने के बाद जांच में चिकनपॉकà¥à¤¸ की पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ हà¥à¤ˆà¥¤ à¤à¤¾à¤°à¤¤ में अब तक मंकीपॉकà¥à¤¸ के चार मामले सामने आठहैं। इनमें से तीन केरल से और à¤à¤• मामला दिलà¥à¤²à¥€ से आया है।
फोरà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸ मेमोरियल रिसरà¥à¤š इंसà¥à¤Ÿà¥€à¤Ÿà¥à¤¯à¥‚ट के इंटरनल मेडिसिन विà¤à¤¾à¤— के निदेशक डॉ. सतीश कौल ने कहा, ‘मंकीपॉकà¥à¤¸ में घाव चेचक से बड़े होते हैं। मंकीपॉकà¥à¤¸ में हथेलियों और तलवों पर घाव दिखाई देते हैं। चेचक में घाव सात से आठदिनों के बाद अपने आप सीमित हो जाते हैं लेकिन मंकीपॉकà¥à¤¸ में à¤à¤¸à¤¾ नहीं होता है। चेचक में घाव में खà¥à¤œà¤²à¥€ महसूस होती है। मंकीपॉकà¥à¤¸ के घाव में खà¥à¤œà¤²à¥€ नहीं होती।’
कौल ने यह à¤à¥€ कहा कि मंकीपॉकà¥à¤¸ में बà¥à¤–ार की अवधि लंबी होती है और à¤à¤¸à¥‡ रोगी में ‘लिमà¥à¤« नोडà¥à¤¸â€™ बढ़े हà¥à¤ होते हैं। बतà¥à¤°à¤¾ असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² के चिकितà¥à¤¸à¤¾ निदेशक डॉ. à¤à¤¸ सी à¤à¤² गà¥à¤ªà¥à¤¤à¤¾ ने चिकनपॉकà¥à¤¸ का कारण बनने वाले वायरस के बारे में कहा कि चिकनपॉकà¥à¤¸ आरà¤à¤¨à¤ वायरस है जो इतना गंà¤à¥€à¤° नहीं है लेकिन इससे तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर चकतà¥à¤¤à¥‡ à¤à¥€ पड़ जाते हैं।
मंकीपॉकà¥à¤¸ के बारे में गà¥à¤ªà¥à¤¤à¤¾ ने बताया कि इस तरह के वायरस के लिठà¤à¤• ‘à¤à¤¨à¤¿à¤®à¤² होसà¥à¤Ÿâ€™ (वायरस के वाहक जानवर) की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है, लेकिन यह गले में खराश, बà¥à¤–ार और सामानà¥à¤¯ वायरस के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के साथ सीमित रहता है। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा, ‘इस वायरस का मà¥à¤–à¥à¤¯ लकà¥à¤·à¤£ शरीर पर à¤à¤¸à¥‡ चकतà¥à¤¤à¥‡ होते हैं जिनके अंदर तरल पदारà¥à¤¥ होता है। इससे वायरल संकà¥à¤°à¤®à¤£ होता है जो शरीर की पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ को कमजोर करता है। लेकिन, इसकी जटिलता के कारण समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होती हैं। मामले में, किसी à¤à¥€ तरह के जीवाणॠसंकà¥à¤°à¤®à¤£ और मवाद होने पर यह बढ़ता जाता है, जिससे शरीर में और जटिलता हो जाती है।’’
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